कानपुर, दिसम्बर 30 -- कानपुर। श्री देवी तालाब मंदिर परिसर, जालंधर में आयोजित 150 वें ''श्री बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन 2025'' के तीसरे एवं अंतिम दिन रविवार को सुर, तालों एवं भावनाओं की ऐसी संगम धारा बही जहां सुषमा बाजपेई के गायन की हर प्रस्तुति श्रोताओं के ह्रदय को स्पर्श करती रही। सुषमा बाजपेई की सशक्त एवं सौम्य गायन प्रस्तुति ने माहौल को गंभीरता एवं गरिमा से भर दिया। उन्होंने राग पूरिया धनाश्रि मे विलंबित एकताल की बंदिश 'अब तो रुत मान आए न बोलूंगी' प्रस्तुत की। पंडित छन्नूलाल मिश्र की राग मिश्र खमाज मे बंदिश की ठुमरी पेश की। सुषमा के साथ पंडित धर्म नाथ मिश्रा के हारमोनियम की मधुर संगत और हरीश झा के तबले पर सधी हुई ताल ने हर बंदिश को जीवंत कर दिया ।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...