नई दिल्ली, अक्टूबर 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 2003 में चाकू और बंदूक से किए गए हमले के दो दोषियों को 'अच्छे आचरण' के आधार पर प्रोबेशन पर रिहा करने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध की 'क्रूरता' के बावजूद, 'गलत सहानुभूति' के कारण ये दोषी बिना एक दिन भी जेल काटे बच निकले। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि मामले की परिस्थितियां, अपराध की प्रकृति और अपराधी का चरित्र ये मुख्य बातें होनी चाहिए जिनके आधार पर यह तय किया जाए कि क्या आरोपी को 'अच्छे आचरण' के आधार पर रिहा करना उचित है या नहीं। इस मामले के तथ्यों को देखें तो ऐसी कोई बात नजर नहीं आती। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और आरोपियों को दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। य...