नई दिल्ली, जुलाई 20 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2016 के दुष्कर्म मामले में दोषी व्यक्ति की सजा उम्रकैद से घटाकर 20 साल (छूट के लाभ के साथ) कर दी। अदालत ने कहा कि उसके सुधरने की गुंजाइश है क्योंकि अपराध के समय वह 25 साल का था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गौर किया कि उस व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जेल में उसका व्यवहार अच्छा रहा है। इस मामले में, दोषी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अपराध के समय वह सिर्फ 25 साल का था। कम उम्र को देखते हुए उसके सुधरने की गुंजाइश है। पीठ ने कहा कि राज्य ने ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं रखा है जिससे यह साबित हो सके कि ऐसा संभव नहीं है, और न ही राज्य ने दोषी की ओर से दिए गए इस बयान का खंडन किया है कि सजा मिलने के बाद से लगभग दस सालों (छूट सहित) में उसका व्यवहार अच्छा रहा ...