नई दिल्ली, जुलाई 31 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चेन्नई में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले की कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप पार्टियों के बीच पूरी तरह से सिविल विवाद की ओर इशारा करते हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता ने पूरी तरह से सिविल विवाद को 'आपराधिक रंग' देने की कोशिश की है, और आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग होगा। शीर्ष अदालत ने दो अपीलकर्ताओं द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के मार्च 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपीलकर्ताओं पर अपराध करने का आरोप था, जिसमें पुराने आईपीसी की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध शामिल थे। यह भी पढ़ें- ईपीएफओ धोखाधड़ी में नोकिया के दो कर्मचारियों पर केस दर्ज शीर्ष...