नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि बैंकों द्वारा खातों को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत करने से पहले उधारकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार नहीं हैं। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें उधारकर्ता को धोखाधड़ी वाला खाता घोषित करने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई देने का बैंक को निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने आरबीआई के धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों की व्याख्या करते हुए कहा कि 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों का पालन करने के लिए कारण बताओ नोटिस देना, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना, उधारकर्ता के जवाब पर विचार करना और कारण के साथ आदेश पारित करना पर्याप्त है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि बैंक किसी खाते को धोखाधड़ी घोषित करने में ...