सुपौल, दिसम्बर 5 -- मरौना, एक संवाददाता। पीएचसी मरौना को भले ही सीएचसी में परिवर्तित कर दिया गया। करोड़ों की लागत से दो मंजिला इमारत भी बनी। मरीजों के लिए 6 बेड की जगह बढ़ाकर 30 बेड कर दिया गया। लेकिन अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर जाना पड़ता है। यह हाल तब है जब पीएचसी में डॉक्टर के 23 पर स्वीकृत हैं जिसके विरूद्ध महज 8 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज प्रभावित होता है। ऐसे में इस इलाके के मरीजों को 300 रुपए ऑटो का किराया देकर मधुबनी जिला के मधेपुर पीएचसी या निजी एक्सरे सेंटर पर जाना पड़ता है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 800 रुपये भुगतान करना पड़ता है। खासकर महीने के नौ तारीख को प्रत्येक सीएचसी और पिएचसी सेंटर पर प्रधानमंत्री मातृव अभियान के तहत गर्भ जांच शिवीर का आयोजन किया जात...