समस्तीपुर, जून 15 -- मोहिउद्दीननगर। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ समापन हुआ। समापन दिवस पर काफी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। एक माह से चल रहे अखंड रामनाम धुन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे और पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण बना रहा। अंतिम दिन कथावाचक पंडित गीता ठाकुर ने श्रीमद्भागवत के अंतिम प्रसंगों में सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित की मुक्ति तथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुदामा की कथा त्याग, समर्पण और निष्काम भक्ति का उदाहरण है और भगवत् श्रवण से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति पा सकता है। यह भी पढ़ें- सच्चे भक्त का सम्मान स्वयं भगवान करते हैं: चैतन्य हरिचरत महाराज कथा समाप्ति के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और पूर्णाहुति हुई, कलश...