वाराणसी, अगस्त 24 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान श्रीकृष्ण कभी नहीं रोए। उनका सबसे प्रिय ब्रज उनसे छूट गया। महाभारत युद्ध में हजारों शव देखे फिर भी श्रीकृष्ण की आंखों में आंसू नहीं आए। परंतु जैसे ही श्रीकृष्ण ने सुदामाजी के चरण धोने शुरू किए उनके पैरों में चुभे कांटे देखकर उनकी आंखों से अश्रुधारा बह निकली। ये बातें बालव्यास पं.श्रीकांत शर्मा ने कहीं। वह श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में हो रही सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को प्रवचन कर रहे थे। महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में आयोजित कथा में उन्होंने कहा कि भारत में आज भी श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता की कमी नहीं है। सच्चे मित्रता की यही पहचान है कि मित्र में ईश्वर की छवि दिखाई पड़े। एक अन्य प्रसंग में उन्होंने कहा कि विद्वान अपनी विद्वता का उपयोग धनार्जन के लि...