आगरा, जनवरी 1 -- समाधि पार्क मंदिर, सूर्य नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को सातवें दिवस श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग का प्रेरक वर्णन किया गया। जिसने श्रद्धालुओं को निष्काम भक्ति, सच्ची मित्रता और मानवता का गहन संदेश दिया। कथा व्यास कीर्ति किशोरी ने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार को यह सिखाती है कि प्रभु अपने भक्त की संपन्नता नहीं, बल्कि उसके हृदय का भाव देखते हैं। दीन अवस्था में मुट्ठी भर चिवड़ा लेकर द्वारकाधीश के द्वार पहुंचे सुदामा को श्रीकृष्ण द्वारा ससम्मान गले लगाना यह दर्शाता है कि सच्ची मित्रता और भक्ति में कोई भेद नहीं होता। इस मार्मिक प्रसंग को सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और पूरा पंडाल "जय श्रीकृष्ण" व "राधे-राधे" के जयघोषों से गूंज उठा। सातवें दिवस कथा के समापन पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.