सुख पुण्य का और दुःख पाप का फल: आचार्य ममगांई
देहरादून, मई 30 -- बगैर भोगे कर्म शान्त नहीं होते। कोई शीघ्र फल देता है तो कोई विलम्ब से। जीवन में जो कुछ भी घटित होता है, वह हमारे प्रारब्ध का फल है। यह विश्वास हमें हर परिस्थिति में संतुष्ट और प्रसन्न रहने की प्रेरणा देता है। यह विचार शनिवार को सहत्रधारा रोड के शनि धाम में कथा व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगांई ने भागवत कथा के दौरान रखे। उन्होंने कहा कि भगवान का विधान सर्वोपरि है और उसमें छिपा हर अनुभव हमें कुछ न कुछ सीख देता है। यदि जीवन में सुख आता है, तो वह पुण्य का फल है और यदि दुख या बीमारी आती है तो वह हमारे पापों का परिणाम है। यह भी पढ़ें- सुख पुण्य का और दुःख पाप का फल: आचार्य ममगांई इस दृष्टिकोण से जीवन को देखने पर मन में शांति बनी रहती है। वहीं रूक्मणी परिणय में सुन्दर झांकी एवं हलवा प्रसाद वितरण का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। रविवा...
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