मोतिहारी, जुलाई 8 -- घोड़ासहन। उर्वरक तस्करी की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। बनकटवा प्रखंड का अगरवा, रेंगनिया,अठमोहान आदि गांव तस्करी के लिए कुख्यात माने जाते हैं ,जहां बड़े पैमाने पर डीएपी व यूरिया की नेपाल को तस्करी की जाती है। लेकिन घोड़ासहन प्रखंड क्षेत्र से लगती सीमा भी इस अवैध कारोबार से अछूता नहीं है। तस्करी में कोई व्यावधान नही उत्पन्न हो इसलिए नेपाल सीमा रेखा की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों व सीमावर्त्ती गांवों में ही उर्वरकों के अनेक दूकान संचालित हैं। इन दूकानों से बाइकोंपर खाद के बोरों को लाद कर ग्रामीण रास्तों से होकर सीमा पार नेपाल पहुंचा दिया जाता है। यह भी पढ़ें- बॉर्डर क्षेत्र में खाद की तस्करी बेलगाम पांच किलोमीटर के दायरे में सीमावर्त्ती गांवों व कस्वों में उर्वरक बिक्री का लाईसेंस आखिर कैसे दिया गया यह जांच का विषय हो ...