सीकरी के सबक याद रखिए
नई दिल्ली, मई 30 -- कभी फतेहपुर सीकरी के प्राचीर से चारों ओर नजर दौड़ा देखिए। आपको अर्द्ध रेगिस्तान की रेतीली तह में इतिहास की कराहटें कसमसाती नजर आएंगी। बादशाह-ए-हिंद जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर ने बड़ी मनखत से सन् 1571 में इसे मुगलिया सल्तनत की राजधानी घोषित किया था। इस नए-नवेले शहर का नामकरण भी उन्होंने बड़े चाव से किया था- फतेहपुर सीकरी, यानी जीत का शहर। इस नगरी को बसाने के पीछे उनका मकसद निहायत निजी, पर संवेदना से भरा हुआ था। कभी सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की रिहाइश यहां हुआ करती थी। उनके आशीर्वाद से ही अकबर को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। यहां से थोड़ी दूरी पर खनवा का वह मैदान भी मौजूद है, जहां उनके पितामह जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर ने राणा सांगा को परास्त कर मुगल राजसत्ता की स्थापना की बुनियाद पुख्ता की थी। सल्तनत की राजधानी के लिए भला इससे ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.