गंगापार, मार्च 29 -- ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी कमी के चलते गृहिणियों और होटल कारोबारियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।पिछले कई वर्षों से बंद पड़े पारंपरिक चूल्हे अब फिर से उपयोग में लाए जा रहे हैं, जिससे दैनिक जीवन में नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। रसोई गैस किल्लत के चलते इन दिनों गांवों और बस्तियों में महिलाएं मजबूरी में लकड़ी और गोबर के उपलों से चूल्हा जलाकर खाना बना रही हैं। खासकर 20 से 25 वर्ष की आयु वर्ग की कई युवतियां, जिन्हें पहले चूल्हे पर खाना बनाने का अनुभव नहीं था, अब इस पारंपरिक तरीके को सीखने को मजबूर हैं। धुएं के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं।राजमार्गों के किनारे गौहनिया,कांटी और आस पास के छोटे-बड़े ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों को भी गैस...
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