नई दिल्ली, सितम्बर 8 -- राजऋषि सिंघल ,वरिष्ठ पत्रकार जंतर मंतर पर जेन-जी के आंदोलन ने न केवल तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया, बल्कि कई अन्य उपलब्धियां भी इसके नाम रहीं। पहली और सबसे दिलचस्प उपलब्धि तो यही रही कि इसने छात्रों की उस क्षमता को पुनर्जीवित करने का काम किया कि शिक्षा प्रणाली की ढांचागत खामियों पर वे अपनी चिंता जाहिर कर सकें; अपने भविष्य के बारे में सत्ता प्रतिष्ठान से सवाल कर सकें और अपने नागरिक अधिकारों की मजबूत दावेदारी पेश कर सकें। दूसरी, इसने एक बार फिर उन अंतर्विरोधों और विरोधाभासों को रेखांकित किया, जो हमारे समाज और हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आंदोलन ने उस मुद्दे पर फिर से देश का ध्यान केंद्रित किया है, जिससे वह भटक गया था। 'क्या मुफ...