रांची, जुलाई 31 -- झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल मानसिक बीमारी का आरोप लगाकर विवाह तलाक नहीं लिया जा सकता। यदि पति या पत्नी अपने जीवनसाथी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर तलाक मांगते हैं, तो उन्हें इसके समर्थन में ठोस, विश्वसनीय और चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। पर्याप्त प्रमाण के अभाव में जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने पति की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। मामला गिरिडीह के एक दंपति से जुड़ा है। पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि शादी की पहली रात ही उसे पत्नी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की जानकारी मिली। उसका आरोप था कि पत्नी के परिवार ने यह तथ्य विवाह से पहले छिपाया था, इसलिए मानसिक बीमारी और क्रूरता के आधार ...