नई दिल्ली, जुलाई 31 -- फैजान मुस्तफा,कुलपति, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विवि बीती 27 जुलाई को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेपर लीक की पहली सुनवाई ही स्थगित करनी पड़ी, क्योंकि सीबीआई के वकील पेश नहीं हुए, जबकि उसी दिन लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया था। महज दो साल के भीतर इस कानून में संशोधन की जरूरत इसलिए आन पड़ी, क्योंकि पेपर लीक के मामले रुक नहीं रहे हैं। बहरहाल, नए विधेयक को संसद के दोनों सदनों ने मंजूर कर लिया है और अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर त्वरित अदालतों के माध्यम से पेपर लीक संबंधी मामलों का निपटारा किया जाएगा। हालांकि, उत्तराखंड, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इससे भी ज्यादा कड़े कानून...