विधि संवाददाता, मार्च 3 -- UP News: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। एक आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को उसके पेशे के आधार पर पुकारने मात्र से एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध नहीं बनता, जब तक यह सिद्ध न हो कि ऐसे शब्द जानबूझकर उस समुदाय से संबंधित व्यक्ति को अपमानित करने की मंशा से कहे गए। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम ने गौतम बुद्ध नगर में एससी/एसटी के विशेष जज के सम्मन आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए की है। अपीलार्थी को आईपीसी की धारा 323, 504 और 506 के साथ एससी/एसटी की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध) के तहत तलब किया गया। इस मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह अपीलार्थी के कपड़े धोती थी। एक दिन जब उसने अपनी मजदूरी मांगी तो उसके साथ रास्ते में दुर्व्यवहार किया गया...