रांची, नवम्बर 5 -- रांची, विशेष संवाददाता। ससुराल में प्रवेश नहीं मिला, अपमानित भी होना पड़ा और मामला पहुंच गया अदालत तक। लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में ऐसा फैसला सुनाया, जिससे सास और ननद को बड़ी राहत मिल गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोकना और अपमानित करना मात्र क्रूरता का अपराध नहीं है। जब तक आरोपों से कानून में निर्धारित अपराध के जरूरी तत्व सामने नहीं आते, तब तक केवल आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा जारी नहीं रखा जा सकता। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने सास और ननद की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत ने लोहरदगा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की ओर से 21 अगस्त 2025 को लिए गए संज्ञान और 10 अगस्त 2026 को आरोप तय करने के आदे...