चंद्रशेखर बुड़ाकोटी। देहरादून, जनवरी 10 -- अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच का फैसला कर मुख्यमंत्री ने जहां जनभावनाओं को प्राथमिकता देने की अपनी नीति-रीति को एक बार फिर से साबित किया। वहीं दूसरी तरफ, अपने इस सधे हुए फैसले से धामी राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष के हाथ एक बड़ा मुद्दा छीनने में भी कामयाब रहे। हालिया कुछ महीनों के भीतर धामी का यह तीसरा फैसला है जब उन्होंने जनभावनाओं को ऊपर रखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिशें की है। इससे पहले एलयूसीसी घेाटाले की जांच की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। उसके बाद यूकेएसएसएसपी पेपर लीक मामले में युवाओं की भावनाओं के अनुसार धामी ने सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी थी। युवाओं के मामले में तो धामी खुद ही परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पहुंच गए थे। उनसे पहले केवल एनडी तिवारी और हरीश रावत ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे,...