मेरठ, अप्रैल 27 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का सोमवार को पूजा अर्चना के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने जाप अनुष्ठान व भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की। शांतिधारा राकेश जैन, आलोक जैन, वीरेंद्र जैन, सुमन जैन ने किया। समस्त श्रद्धालुओं ने शांतिधारा में सहयोग किया तथा मंत्रों का शांति के साथ श्रवण किया। मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि यह विधान सर्वाधिक श्रद्धात्मक विधान है,। इस विधान में शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है, जिसमें प्रथम शब्द ही अर्हम कहा गया है। जिसमें आ से लेकर ह तक के शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सर्वप्रथम अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को अंक कला एवं अक्षर कला का ज्ञान दिया। इसी कारण आज भी ब्राह्मी लिपि सबसे प्राचीन मानी गई है। जो धीर...