नई दिल्ली, फरवरी 1 -- केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज के एक फैसले को चुनौती दी है। केंद्र के वकील ने कहा कि सिंगल जज का फैसला असिस्टेड रिप्रोडक्शन और सरोगेसी पर मौजूदा कानून के खिलाफ है। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक प्राइवेट अस्पताल को एक अविवाहित मृत व्यक्ति के फ्रोजन गेमेट्स (अंडे या शुक्राणु) उसके माता-पिता को देने के आदेश को चुनौती दी है। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र की अपील पर माता-पिता को नोटिस जारी किया, जिसमें सिंगल जज के 2024 के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले में कहा गया था कि अगर स्पर्म या अंडे के मालिक की सहमति साबित की जा सकती है तो मौत के बाद रिप्रोडक्शन (प्रजनन) पर कोई रोक नहीं है। 29 जनवरी को दिए गए अपने आदेश में बेंच ने अपील की सुनवाई के लि...