औरैया, मार्च 11 -- फफूंद, संवाददाता। पवित्र माह रमज़ान में ज़कात अदा करने का विशेष महत्व है। मौलाना खलील उल्लाह ने कहा कि इस्लाम में ज़कात को अहम इबादत माना गया है और साहिबे निसाब मुसलमानों पर ज़कात देना फर्ज है। उन्होंने कहा कि ज़कात केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि समाज में बराबरी, भाईचारे और इंसानियत को मजबूत करने का माध्यम भी है। मौलाना ने बताया कि कुरआन शरीफ में कई जगह नमाज़ के साथ ज़कात अदा करने का जिक्र किया गया है, जिससे इसकी अहमियत साफ होती है। उन्होंने कहा कि जिस मुसलमान के पास निर्धारित मात्रा में माल या संपत्ति हो, उस पर साल पूरा होने के बाद उसका ढाई प्रतिशत हिस्सा ज़कात के रूप में गरीबों और जरूरतमंदों को देना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि ज़कात का असली मकसद समाज के गरीब, यतीम, विधवा, मुसाफिर और जरूरतमंद लोगों की मदद करना है, ताकि ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.