भागलपुर, अगस्त 14 -- सुल्तानगंज, निज संवाददाता। श्रावणी मेला प्रारंभ होते ही सुल्तानगंज दुल्हन की तरह सज जाता है। कांवरियों का आना और पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाकर सुल्तानगंज से बाबाधाम के लिए प्रस्थान करना अनवरत जारी रहता है। वर्ष 1978 में बीबीसी ने इस मेले को विश्व का सबसे बड़ा मानव मेला कहा था। अन्य मेले किसी एक शहर में आयोजित होकर वहीं समाप्त हो जाते हैं, लेकिन सुल्तानगंज में लगने वाला श्रावणी मेला 104 किलोमीटर दूर देवघर जाकर समाप्त होता है। सुल्तानगंज की न केवल उत्तरवाहिनी गंगा पवित्र है, बल्कि यहां की मिट्टी (मृतिका) भी पवित्र मानी जाती है, जिसे बेचकर कई परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं। यह भी पढ़ें- पवित्र गंगाजल और महादेव के प्रति समर्पण का अनुष्ठान है श्रावणी मेला कांवरिया इस मृतिका का उपयोग पूजा के लिए करते हैं। मेला शुरू...