सावन में विधान से करो शिव की उपासना, पूर्ण होगी मनोकामना धर्मकर्म, आचार्य उत्कर्ष ने बताया उपासना का शास्त्रीय विधान
अंबेडकर नगर, अगस्त 11 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। सनातन धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव का सर्वाधिक प्रिय एवं पुण्यदायी मास माना गया है। इस पावन मास में श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधानपूर्वक भगवान शिव की आराधना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा समस्त पापों एवं कष्टों से मुक्ति की प्राप्ति होती है। श्रावण केवल एक मास नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, तप, संयम, सेवा और शिवभक्ति का दिव्य पर्व है। आचार्य पंडित उत्कर्ष तिवारी सचिन ने बताया कि पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट (हलाहल) विष को सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान शिव ने अपने कण्ठ में धारण किया। विष की तीव्र उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, दुग्ध, गंगाजल, बिल्वपत्र, ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.