उन्नाव, अप्रैल 2 -- उन्नाव। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जिस स्मार्टफोन को हम बच्चों को चुप कराने का साधन समझते हैं, वही उनके मानसिक विकास का दुश्मन बन रहा है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना काल के बाद से बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि हर 100 में से एक बच्चा इस समस्या का शिकार है। क्या है ऑटिज्म और क्यों है खतरनाक?ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल समस्या है, जो जन्म के शुरुआती वर्षों (विशेषकर 2 से 5 वर्ष) में दिखाई देने लगती है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सेंगर बताते हैं कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। स्मार्टफोन की लत उन्हें 'वर्चुअल वर्ल्ड' का आदी बना देती है, जिससे उनका वास्तविक सामाजिक विकास रुक जाता है।डॉक्टर की रायस्मार्टफोन के...