नई दिल्ली, फरवरी 6 -- डिमेंशिया को लोग अक्सर बढ़ती उम्र की समस्या मानते हैं, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च कई मामलों का इसका संबंध रोजमर्रा की आदतों से जोड़कर भी देखती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, लगभग आधे डिमेंशिया के मामलों में कई ऐसे जोखिम कारक शामिल होते हैं, जिन्हें सही आदतों को अपनाकर समय रहते कम किया जा सकता है। शारदा केयर हेल्थ सिटी के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड न्यूरोसाइंसेज डॉ. अतमप्रीत सिंह कहते हैं कि सबसे पहले समझना जरूरी है कि डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता में धीरे-धीरे होने वाली कमी का समूह है, जिसमें अल्जाइमर जैसी बीमारियों का नाम भी शामिल है। कई लोगों को यह लगता है कि इस समस्या को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण ऐसे हैं जिन्हें कंट्रोल करके ज...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.