नई दिल्ली, मार्च 2 -- रंगोहोली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस दिन त्वचा पर लगाए जाने वाले केमिकल्स भरे रंग आपके मूड स्विंग और हॉट फ्लैशेस को बढ़ाने का कारण भी बन सकते हैं? खासकर उन महिलाओं के लिए जो रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौर से गुजर रही हैं, यह केवल त्वचा की जलन का मामला नहीं है। शरीर में पहले से ही हो रहे हार्मोनल बदलावों के बीच, इन सिंथेटिक रंगों में मौजूद 'एंडोक्राइन डिसरप्टर्स' (Endocrine Disruptors) आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। पसीने के साथ सोखे गए ये केमिकल न केवल आपके हॉट फ्लैशेस (Hot Flashes) को बढ़ा सकते हैं, बल्कि आपकी रातों की नींद और मानसिक शांति में भी खलल डाल सकते हैं। मेनोवेदा की संस्थापक और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानने की कोशिश करते हैं कि गुलाल के चटख रंगों के पीछे छिपे रसायन आखि...
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