चाईबासा, फरवरी 25 -- गुवा, संवाददाता। 23 फरवरी को रांजाबुरु खदान को बंद कर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का साफ कहना है हम भूखे रह लेंगे, लेकिन अपना अधिकार नहीं छोड़ेंगे। खुले आसमान के नीचे सैकड़ों ग्रामीण, जिनमें मानकी, मुंडा, मुखिया, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल थे। जंगल के बीच डटे रहे। अचानक हुई बारिश, ठंड और जंगली जानवरों की आवाजों के बीच पूरी रात सभी सक्रिय रहे। कुछ लोगों ने आग जलाकर ठंड से बचने की कोशिश की, तो कई लोग पूरी रात जागते रहे ताकि किसी अनहोनी से साथियों की रक्षा कर सकें। सुबह होते ही आंदोलन स्थल पर नारे गूंज उठे हमारी जमीन, हमारा हक और रोजगार नहीं तो खनन नहीं। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पानी और चिकित्सा सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं की गई। महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ...