सहरसा, फरवरी 25 -- कहरा, एक संवाददाता। संत लक्ष्मीनाथ के द्वारा बनगांव में दो सौ वर्ष पूर्व शुरू किए गए परम्परा के अनुसार ही आज भी होली खेली जा रही है। यहां की होली आज भी साम्प्रदायिक एवं जातिगत सदभावना व एकता का प्रतीक है। यहां जाति एवं साम्प्रदायिक अवरण को ध्वस्त कर आपसी वैर भाव भूलकर सभी जाति व धर्म के लोग एक दूसरे से गले मिल एवं कंधे पर चढ़कर होली है का उदघेष करते हुए भगवती स्थान परिसर में होली खेलते हैं। बनगांव की होली साम्प्रदायिक एवं जातीय एकता का प्रतीक मानी जाती है। गांव भर में उत्सव का अनोखा स्वरूप: सभी जाति, सम्प्रदाय के युवा, बुजुर्ग ग्रामीण दिन का भोजन करने के पश्चात पहले अपने-अपने टोला स्थित सार्वजनिक स्थल पर समूह में एकत्र हो एक दूसरे के गले मिल एक दूसरे के कंधे पर चढ़ होली खेलते है। फिर सभी अलग-अलग समूह में ललित झा बंगला, मन...
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