मुजफ्फरपुर, फरवरी 11 -- सकरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। चंदनपट्टी गांव के पोखर परिसर में बुधवार को स्मृति शेष बटुक देवनारायण सिन्हा रचित 'मधुर स्मृतियां' पुस्तक का लोकार्पण सह आध्यात्मिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें साहित्य, अध्यात्म और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम दिखा। कवियों की रचनाओं में अध्यात्म के रहस्य झलके। वहीं, सामाजिक विसंगतियों पर तीखा कटाक्ष और देशप्रेम की आवाज गूंजती रही। कविवर डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने जिनके दिव्य चरण से निःसत श्रेयस सुख शत धार, पिता की महिमा अपरम पार। डॉ. प्रेम कुमार पांडेय ने जहां कविसंग होता है, वहां पर नित्य जाओ तुम। कवि दुखित महतो भक्तराज ने शिव जटा से निकलती गंगा, भारत भू पर बहती है। कवि चांद मुसाफिर ने किसी की बेबसी पर बेवजह हंसना नहीं सीखा, दोस्तों को आस्तीन का सांप बन डसना नहीं सीखा। कविवर दिनेश प...