जामताड़ा, अगस्त 5 -- झारखंड निर्माता, पद्म भूषण, दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर जामताड़ा की मिट्टी और उसकी जनता का हृदय गहन पीड़ा से व्याकुल है। यहीं से उनके जीवन का पहला संघर्ष उभरा था। महाजनी प्रथा के अत्याचार, जमीनों की बेदखली और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उन्होंने जामताड़ा को अपना प्रारंभिक मंच बनाया। इस धरती पर उन्होंने जो बीज बोया, वही आगे चलकर झारखंड आंदोलन की मजबूत जड़ें बना। उक्त बाते दिवंगत विधायक विष्णु भैया के निजी सचिव मनोज झा ने उनके पुण्यतिथी पर कही। कहा कि जब विष्णु भैया ने स्वेच्छा से अपना पद त्याग दिया, तब दिशोम गुरु जी जामताड़ा के जनप्रतिनिधि बने। यह भी पढ़ें- पिता की हत्या से 'दिशोम गुरु' बनने तक का सफर, शिबू सोरेन ने कैसे बदली झारखंड की राजनीति? सम्पूर्ण झारखंड ने गुरु जी को मुख्यमंत्री के रूप में देखा है। पर जाम...