साधना से संकल्प तक, कला साधकों की नई सांस्कृतिक यात्रा
गढ़वा, जून 11 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। भारत की सांस्कृतिक परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा भी है। जब किसी विचार में समाज को प्रेरित करने की शक्ति होती है, तो वह सीमित दायरों से निकलकर जन-आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर लेता है। भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में डॉ. संध्या पूरेचा द्वारा प्रस्तुत साधना की अवधारणा आज ऐसी ही प्रेरणा का स्रोत बनती दिखाई दे रही है। उक्त बातें पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच नीरज श्रीधर ने कही।
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