लखनऊ, अप्रैल 19 -- ठाकुरगंज स्थित भगवान परशुराम जी मंदिर में आयोजित भगवान श्री परशुराम के 20वें जन्मोत्सव महोत्सव के तहत चल रही श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ समाप्त हुई। कथा व्यास डॉ. योगेश व्यास ने सुदामा चरित्र एवं भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का अत्यंत मार्मिक एवं ज्ञानवर्धक वर्णन किया। कहा कि साधना और संपत्ति सदैव गुप्त रखनी चाहिए, क्योंकि सच्ची भक्ति और साधना ही मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है। सुदामा जी के भले ही लौकिक धन न था, परंतु उनकी भक्ति और साधना का बल उन्हें भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ता है। डॉ. व्यास ने भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में केवल मनुष्यों से ही नहीं, बल्कि जड़, चेतन एवं परिस्थितियों से भी निरंतर शिक्षा प्राप्त होती रहती है। यह भी पढ़ें- परशुराम जय...