रिषिकेष, मई 3 -- परमार्थ निकेतन में रविवार को तीन दिवसीय मौन रिट्रीट का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए साधकों ने मौन के माध्यम से अपने भीतर के शोर को शांत कर आत्मिक गहराइयों से संवाद को आत्मसात किया। रविवार को परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने तीन दिवसीय मौन रिट्रीट के अंतिम दिन साधकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा के पास बाहरी दुनिया के कोलाहल में उलझने के कई साधन है। इसलिये जरूरी है कि प्रतिदिन कुछ समय मौन के माध्यम से अपने भीतर की शांति को खोजा जाये। सेवा, संवेदना और समर्पण के माध्यम से जीवन को ऊंचाइयों तक ले जाना ही परमार्थ का परम उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उपनिषदों का ज्ञान मौन की गहराइयों से ही प्रकट हुआ। जहाँ शब्द समाप्त होते हैं, वहीं सत्य का उदय होता है। मौन केवल ध्वनि का अभाव नहीं, बल्कि चेतन...