दुमका, फरवरी 28 -- दुमका। संताल आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व बाहा इन दिनों पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। दुमका जिला अंतर्गत मसलिया प्रखंड के झिलुवा गांव में ग्रामीणों द्वारा बाहा पर्व अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बाहा पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। प्रथम दिन को जाहेर दाप माह, द्वितीय दिन को बोंगा माह तथा तृतीय एवं अंतिम दिन को शरदी माह कहा जाता है। इस अवसर पर ग्रामीण गांव के नायकी (पुजारी) को उनके आंगन से पारंपरिक नृत्य-गान के साथ जाहेर थान तक ले गए। वहां पहुंचने पर नायकी ने बोंगा दारी (पूज्य वृक्ष) सारजोम (सखुआ) पेड़ के नीचे स्थित पूजा स्थलों का गोबर एवं जल से शुद्धिकरण किया, जिसे गेह-गुरिह कहा जाता है। इसके पश्चात सिंदूर एवं काजल अर्पित कर मातकोम (महुआ) ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.