उरई, मार्च 22 -- सिरसाकलार। एक तरफ जहां सरकार 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत हर गांव को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने का दावा कर रही है, वहीं सिरसाकलार में यह दावा ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहा है। यहां की बढ़ती आबादी के बीच सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नियमों की उड़ रही धज्जियां उत्तर प्रदेश शासन के मानकों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 700 से 1,000 की आबादी पर कम से कम एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य है। सिरसाकलार की वर्तमान अनुमानित आबादी लगभग 7,000 से अधिक हो चुकी है। सरकारी नियमों के हिसाब से यहां कम से कम 7 से 8 सफाई कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में यहाँ की स्थिति चिंताजनक है। दो कंधों पर 7 हज़ार का बोझ पूरे गांव की सफाई का जिम्मा केवल दो सफाई कर्मचारियों राजकुमार और विजय बाबू के भरोसे छोड़ दिया गय...