वाराणसी, अप्रैल 13 -- वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह के 103वें संस्करण की समापन निशा पीछे छूट चुकी थी लेकिन संगीत का सिलसिता सूर्योदय के बाद भी जारी रहा। सुबह की पहली किरण के साथ पं.साजन मिश्र ने राग वैरागी भैवर के सुरों से संगीत का अद्भुत संसार रचा। पुत्र स्वरांश के सहयोग से उन्होंने रुद्रावतार हनुमान का सुर शृंगार कर श्रोताओं को सालभर के लिए विदाई दी। भैरव थाट के बेहद कठिन राग की अदायगी जिस सरलता से पं.साजन मिश्र ने की वह दूसरे के वश की बात नहीं। भैरव और भैरवी के मिश्रण में दोनों रागों का स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना उनकी साधना का ही प्रतिफल रहा। पूर्वांग में राग भैरव की ठसक दिखी तो उत्तरांग में भैरवी के स्वर उनके अधरों पर नर्तन करते रहे। वादी स्वर म और संवादी स्वर स जहां खिल कर सामने आए वहीं रे, ध और नी की कोमलता लाजवाब रही। विलंबित एक ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.