गोरखपुर, अप्रैल 8 -- गोरखपुर। मुख्य संवाददाता। कभी घंटाघर का नाम सुनते ही लोगों की पहली प्रतिक्रिया होती थी,'गाड़ी मत ले जाना. फंस जाओगे।' संकरी गलियों, घंटों के ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित बाजार के बीच यह इलाका महानगर की मजबूरी बन चुका था। 20 से अधिक जिलों का व्यापार यहां से संचालित होता था, लेकिन जाम और अव्यवस्था कारोबार की रफ्तार को थामे रखते थे।ऐसे में जब 2017 के बाद महानगर के सड़कें चौड़ी और व्यवस्थित होने लगी तो यहां के बाजारों की रौनक भी खत्म होने लगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ ने सुगम परिवहन और समृद्ध बाजार की सोच के साथ यहां विरासत को सहेजने की सोच के साथ काम किया। आज वही घंटाघर स्मारक और बाजार एक नए रूप में सामने है। व्यवस्थित, आधुनिक और जीवंत। चौड़ी दो-लेन सड़कें, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और ढकी हुई नालियों ने न केवल यातायात को सुगम...