रांची, जुलाई 5 -- रांची, वरीय संवाददाता। रिम्स के ट्रॉमा सेंटर सहित कई प्रमुख विभागों में वेंटिलेटरों की संख्या मरीजों के अनुपात के मुकाबले कम होने से इलाज पर असर पड़ रहा है। जितने वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, उनमें से भी करीब दो दर्जन मशीनें खराब हैं। ऐसे में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों की सांसों पर आफत की चिंता सताती रहती है। हालात ये हैं कि ट्रॉमा सेंटर में वेंटिलेटर की टीस यानी कमी के चलते मरीजों को कई बार एंबुलेंस में उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। समय पर वेंटिलेटर सपोट नहीं मिलने से कई मरीजों के ऑपरेशन तक टालने पड़ रहे हैं। सबसे अधिक दबाव ट्रॉमा सेंटर पर है। यहां सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ट्रॉमा सेंटर में बेड और वेंटिलेटर की कमी के चलते कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कई बार ...