नई दिल्ली, जून 10 -- एक तरफ डॉक्टर एम्बू बैग दबाकर मरीज की सांसें बचाने की कोशिश कर रहे थे, दूसरी तरफ प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर ऑक्सीजन सिलेंडर और वार्ड बॉय का इंतजार हो रहा था। यह दृश्य किसी छोटे अस्पताल का नहीं, बल्कि राजस्थान की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल का था, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही एक प्रसूता को करीब 10 मिनट तक सिस्टम की लापरवाही का सामना करना पड़ा।इमरजेंसी गेट पर ही रुक गई जिंदगी की जंग मंगलवार को जनाना अस्पताल से गंभीर हालत में रेफर होकर आई आठ माह की गर्भवती महिला को एसएमएस इमरजेंसी के पोर्च पर ही रोक दिया गया। महिला वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी और उसकी हालत बेहद नाजुक थी। एम्बुलेंस अस्पताल पहुंच चुकी थी, लेकिन मरीज को अंदर ले जाने के लिए न तो समय पर वार्ड बॉय मिला और न ...