खगडि़या, अप्रैल 9 -- परबत्ता । एक प्रतिनिधि अपार धन संपत्ति ऐश्वर्य प्राप्त कर लेने के बाद भी लोगों को सुख शांति संभव नहीं हो पाया है। जब तक मनुष्य सांसारिक सागर से पार नहीं हो जाता तब तक जीवन में सुख शांति संभव नहीं है। यह बातें गुरुवार को दो दिवसीय संतमत सत्संग के 44वां जिला अधिवेशन के अंतिम दिन स्वामी चतुरानन्द जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा बिना गुरु मनुष्य क़ो ज्ञान संभव नहीं है। उन्होंने कहा जीवन क़ो भवसागर से पार उतारना है तो गुरु के दिशा निर्देश का अनुकरण करना होगा। अगर संकट से मुक्ति पाना चाहते है तो ज्ञान ध्यान करना बहुत जरूरी है। अपने क़ो हर संभव पांच पापों से बचाना होगा। गंगा स्नान से पाप नहीं धुलता है सिर्फ मन की संतुष्टि मिलती है। मनुष्य क़ो हर हमेशा अपने कर्म पर विश्वास करना होगा। इधर उन्होंने कहा इसलिए तो कहा गया है कि कर्म कि...