कुशीनगर, सितम्बर 4 -- कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। सांप के काटने के बाद जिंदगी और मौत के बीच का फासला कई बार सिर्फ कुछ घंटों का ही होता है। इन कुछ घंटों में पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो जहरीले सांप के जहर को भी मात दी जा सकती है, लेकिन यही समय झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में निकल जाए तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सर्पदंश के आंकड़े कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के जुलाई और अगस्त के आंकड़े इस फर्क को साफ तौर पर सामने ला रहे हैं। इन दो महीनों में सर्पदंश के 633 पीड़ित मेडिकल कॉलेज पहुंचे। चिकित्सकों ने समय रहते उनका उपचार शुरू किया और सभी 633 की जान बचा ली गई।

सर्पदंश की गंभीरता यह आंकड़ा सिर्फ मरीजों की संख्या भर नहीं है, सर्पदंश के उपचार को लेकर गांवों में कायम उस धारणा पर भी सवाल खड़ा करता है, जिसमें आज भी सांप के काटने के बाद सबसे पहले झाड़-फ...