नई दिल्ली, मार्च 3 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की जमानत इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती कि एक समान अपराध में दूसरे आरोपी को जमानत नहीं दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि समानता के आधार पर जमानत मिलने की परिस्थति अलग होती हैं, लेकिन मिली हुई जमानत को रद्द करने के हालात भी विपरीत होते हैं। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि जब तक पहले जमानत पाने वाला आरोपी तय शर्तों का उल्लंघन न करे, तब तक उसकी जमानत को रद्द करने की मांग नहीं की जा सकती। पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए उस याचिका को खारिज किया, जिसमें 6 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी व जालसाजी मामले में एक आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा, दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही है। हाईकोर्ट ने इन दलीलो...