मुजफ्फरपुर, जनवरी 10 -- मुजफ्फरपुर। जिले से होकर बहने वाली गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती सूखने लगी हैं। तेजी से समाप्त हो रहे सहायक नदियों के अस्तित्व के कारण जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली ये नदियां भी अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं रहीं। 500 मीटर से अधिक तक की औसत चौड़ाई वाली ये नदियां मुजफ्फरपुर आते-आते कई जगहों पर सिकुड़ कर नाले की शक्ल ले चुकी हैं। अनियोजित शहरीकरण, औद्योगीकरण और नालों का गंदा पानी इन नदियों में बहाने के कारण कई स्तरों पर समस्या खड़ी हो गई है। खेती के लिए इन नदियों पर निर्भर रहने वाले किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। सीमांत किसानों के सामने तो दिहाड़ी मजदूरी की नौबत आ गई है। मत्स्यपालकों का रोजगार छिन रहा है तो करीब डेढ़ दर्जन मछलियों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी हैं। 'हिन्दुस्तान' के अभियान 'आएं अपनी नदी बचाएं' के तहत शु...