भागलपुर, जून 3 -- कहरा से विजय झा की रिपोर्ट कहरा। एक ओर सरकार द्वारा दूध उत्पादन एवं पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए पशु पालको को ऋण दिया जाता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में आए आसामयिक आंधी एवं बारिश में गेहूं की फसल बर्वाद होने से पशुओं के लिए सूखा चारा (गेहूं का भूसा) की कमी हो गयी है। परिणामस्वरूप अधिकता के कारण बेचने बाले स्वंय क्षेत्रीय पशु पालक महंगे भाव में अन्य क्षेत्र से आयतीत भूसा खरीद पशुओं को खिला पशु पालन करने को विवश है। महंगे भाव में भूसा खरीद पशओं को खिलाना सभी पशुपालकों के सामर्थय में नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर निचले एवं मध्यम बहियार में मखाना के खेतीवाड़ी किए जाने से हरा चारा का भी संकट उत्पन्न होकर रह गया है। यह भी पढ़ें- सहरसा: भूसा बेचने वाले अब खुद कर रहे आयात जबकि इन खेतों मे मूंग एवं अन्य फसलों की खेतीवाड़ी होने...