नई दिल्ली, फरवरी 19 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला द्वारा शारीरिक संबंध बनाने के लिए दी गई सहमति को बाद में वापस नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पहले सहमति से संबंध बनाना और फिर रिश्ता टूटने पर उन संबंधों को दण्डनीय अपराध में लाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। ऐसा करना गलत है। हाईकोर्ट ने यह बात एक वकील और उसके रिश्तेदारों को रेप, धोखे से शादी और दूसरे गंभीर आरोपों से बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कही। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कानून को महिलाओं को असली यौन शोषण, जबरदस्ती और गलत व्यवहार से बचाने के लिए सतर्क रहना चाहिए, साथ ही उसे अपने प्रोसेस के गलत इस्तेमाल से भी बचना चाहिए। यह भी पढ़ें- यौन शोषण पीड़िता का नाम कोर्ट डॉक्यूमेंट में भी प्रकट न करें, पुलिस से बोला HC लाइव लॉ ...