प्रयागराज, जनवरी 29 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए एक आदेश में कहा है कि सहमति से विवाह के वादे और उसके कारण बने यौन संबंध को विवाह का झूठा वादा कर बनाया गया यौन संबंध करार नहीं दिया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने झूठे विवाह-प्रलोभन के आधार पर यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। अलीगढ़ के जितेंद्र पाल और दो अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने सुनवाई की। अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने के मामले के अनुसार, याचियों के खिलाफ पीड़िता ने मुकदमा दर्ज़ करा आरोप लगाया कि याची ने विवाह का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाए। साथ ही याची के भाई और भाभी पर आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351...
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