वाराणसी, जनवरी 28 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा सहनशीलता ही है। वह काशी विद्यापीठ में आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन बुधवार को विचार व्यक्त कर रहे थे। आयोजन महामना मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और प्रो. वासुदेव सिंह स्मृति न्यास की तरफ से किया गया था। प्रो. अनूप ने कहा कि सारे धर्मों का सारांश है मानव हो जाना। दया, करुणा, सहनशीलता सभी धार्मिक ग्रंथों का सार है। मुख्य अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि की पूर्व कुलपति प्रो. निर्मला मौर्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें सिखाती है कि संसार में ऐसी कोई वस्तु या ज्ञान नहीं है जिसे मनुष्य तप, साधना और निरंतर प्रयास से प्राप्त न कर सके। अन्य सत्रों में रांची ...