वाराणसी, फरवरी 27 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पं.शांतिप्रिय द्विवेदी सही अर्थों में सर्वहारा साहित्यकार थे। उनकी गणना मुख्य रूप से निबंधकार एवं छायावादी समीक्षक के रूप में होती है। वह समर्थ कवि, उपन्यासकार, संस्मरणकार एवं आत्मकथा लेखक भी थे। ये बातें साहित्यिक पत्रिका सोच विचार के संपादक पं.नरेंद्रनाथ मिश्र ने कहीं। वह साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास की ओर से पं.विद्यानिवास मिश्र की जन्म शताब्दी पर संकल्पित 'हिंदी की धरोहर काशी की सृजन परंपरा' शृंखला के तहत शुक्रवार को व्याख्यान दे रहे थे। अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय के सभागार में हुए आयोजन में उन्होंने कहा कि द्विवेदीजी को छायावादी कविता की गहरी समझ थी। स्वतंत्रता पूर्व के दो दशकों में छायावाद को लेकर जनसामान्य में जो ऊहापोह चल रहा था, उसमें उनका हस्तक्षेप बहुत ही मजबूत था। ड...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.