सराईकेला, मार्च 14 -- सरायकेला। सरायकेला की मिट्टी की पहचान और विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर 'छऊ नृत्य' आज अपने अस्तित्व और मौलिकता की लड़ाई लड़ रहा है। सरायकेला राजपरिवार के सदस्य राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने छऊ के गिरते स्तर और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक प्रेस वार्ता मे उन्होंने स्पष्ट किया कि 13 अप्रैल को मनाया जाने वाला 'चैत्र पर्व' केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि सरायकेला छऊ की आत्मा और सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे प्रशासन की अनदेखी ने महज एक 'इवेंट' तक सीमित कर दिया है। परंपरा बनाम इवेंट की राजनीतिराजा प्रताप आदित्य सिंहदेव का कहना है कि प्रशासन चैत्र पर्व की धार्मिक और पारंपरिक महत्ता को समझने में विफल रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्रशासन को नृत्य का प्रदर्शन ही करना है, तो इसके लिए 29 अप्रैल (अंतरराष्ट...